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मिड डे मील वर्कर्स का प्रथम उत्तर प्रदेश राज्य सम्मेलन

उत्तर प्रदेश मिड डे मील वर्कर्स यूनियन सम्बद्ध ऑल इंडिया सेंट्रल काउंसिल ऑफ ट्रेड यूनियंस (ऐक्टू) का राज्य सम्मेलन 22 दिसंबर 2024 को लखनऊ में एपी सेन रोड स्थित श्रम विधि सलाहकार परिषद सभागार में संपन्न हुआ.

सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए भाकपा(माले) के राज्य कमेटी सदस्य का. रमेश सेंगर ने कहा कि यह सम्मेलन एक ऐसे दौर में हो रहा है जब मेहनतकशों के संविधान प्रदत्त अधिकारों को ही नहीं छीना जा रहा है, बल्कि भाजपा सरकार संविधान को ही खत्म करने में जुटी हुई है. आज मजदूर वर्ग के सामने संविधान बचाने की लड़ाई प्रमुख हो गई है.

उन्होंने कहा कि एक ओर देश की सारी संपत्तियां पूंजीपतियों को भेंट की जा रही हैं तो दूसरी और मेहनतकश हिस्से को एक जून की रोटी से भी वंचित किया जा रहा है. आज एकताबद्ध संघर्षों की जरूरत है और उसके लिए फौलादी संगठनों के निर्माण की जरूरत है.

सम्मेलन की मुख्य अतिथि जयश्री गंगवार ने कहा कि स्कीम के नाम पर पूरे देश में महिला श्रम की लूट जारी है. मुफ्त में बेगार कराई जा रही है. उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में सर्वाधिक शोषण हो रहा है. अन्य राज्यों की तुलना में यहां उनको कम भुगतान मिलता है जबकि यूपी में मात्रा 2000 रु. देकर सरकार अपनी पीठ ठोक रही है. यही हाल आशा सहित अन्य स्कीम वर्कर्स का है.

ऑल इंडिया स्कीम वर्कर्स फेडरेशन की राष्ट्रीय परिषद सदस्य अनीता ने कहा कि  रसोइया कर्मी बहुत अल्प मानदेय पर और बेहद कठिन परिस्थितियों में अपने कार्य को वर्षा से कुशलता पूर्वक संपादित करती आ रही हैं. न तो कोई स्वास्थ्य सुविधा है और न ही जीवन बीमा. नवीनीकरण के नाम पर मनमाने ढंग से निष्कासन आम बात हो गई है. धुंआ मुक्त प्रदेश में हम जुगाड की लकड़ी में खाना पकाने के लिए बाध्य हैं. गैस सिलेंडर नुमाइश का सामान भर हैं. खाना बनाने के साथ सफाई कर्मचारी से लेकर चपरासी तक के सारे काम करने पड़ते हैं. आकस्मिक और बीमारी का कोई अवकाश नही मिलता. 45 वें भारतीय श्रम सम्मेलन ने वर्ष 2013 में मिड डे मील, आशा और आंगनवाड़ी वर्कर्स को कर्मचारी मानकर न्यूनतम वेतन दिए जाने, ईपीएफ, ग्रेच्यूटी, पेंशन और मातृत्व अवकाश दिए जाने की सिफारिश की थी किंतु भाजपा सरकार उन सिफारिशों की अनदेखी कर रही है. आज मिड डे मील, आशा व आंगनवाड़ी वर्कर्स के साथ-साथ सभी स्कीम वर्कर्स को साझे संघर्ष में जाने की जरूरत है.

ऐपवा नेता सरोजनी ने कहा कि महिलाएं हमले का सर्वाधिक शिकार हैं. फासीवादी भाजपा सरकार इन महिला अपराधों को रोकने के बजाय अपराधियों को संरक्षण दे रही है. महिलाओं को अपने सम्मान की रक्षा के लिए संगठित होने और सचेत रहकर संघर्ष की जरूरत है. सम्मेलन को ऐक्टू के राज्य सचिव अनिल वर्मा, संगठन सचिव राणा प्रताप सिंह, लखनऊ जिलाध्यक्ष मधुसूदन मगन ने भी संबोधित किया. अंत में 21 सदस्यीय कमेटी का चुनाव किया गया. कमला गौतम अध्यक्ष और सरोजनी देवी को राज्य सचिव चुना गया.

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30 December, 2024